भावनात्मक दुव्र्यवहार व हिंसा का पीड़ितों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इसलिए ऐसी कार्यशालाएं अक्सर आयोजित की जानी चाहिए।

सम्पूर्णा एफ.सी.सी. (फैमिली काउंसलिंग सेंटर) ने ‘‘सेंटर फोर रिसर्च आन वोमन एंड सोसाईटी‘  के साथ आज ‘‘घरेलू हिंसा का मुकाबला कैसे करें ?‘‘ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।

ngo सम्पूर्णा ने रोहिणी में ‘‘घरेलू हिंसा का मुकाबला कैसे करें ?‘‘  विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला में फैमिली काउंसलिंग सेंटर के सदस्यों, महिलाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया था। कार्यशाला का प्रथम उद्देश्य महिलाओं को संवेदनशील बनाना एवं यह समझाना है कि घरेलू हिंसा क्या है? क्योंकि हमारे देश में अत्यधिक शिक्षित महिलाएं भी समझ नहीं पाती हैं कि रोजमर्रा के ताने और अभद्र व्यवहार भी घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005‘  के अनुसार घरेलू हिंसा है। नियमित रूप से यदि इस प्रकार के व्यवहार को लम्बे समय तक सहा जाये तो महिलाएं शारिरीक रुप से बीमार हो सकती हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हर महिला को घरेलू हिंसा की अवधारणा जाननी चाहिए।

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